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मालनपुर ही क्यों बना भिण्ड जिले का इंडस्ट्रियल हब? जानिए बड़ी वजहें.!

अक्सर कुछ लोगों को #शिकायत रहती हैं कि #मालनपुर ओद्योगिक क्षेत्र का लाभ भिंड जिले को नहीं मिलता है। इसी मुद्दे का लाभ उठाकर क्षेत्रीय नेता भी भेदभाव दिखाकर लोगो को बरगलाते है। सच तो ये है कि असल में भिंड शहर का स्थानीय नेता मालनपुर के विकास से जलता है। क्योंकि भिंड विधानसभा से निकला नेता भिंड क्षेत्र में कोई खास विकास के काम करवा नही पाया। जैसे कि फैक्ट्री, मेडिकल कालेज, यूनिवर्सिटी, सेंट्रल या राज्य का कोई हेड ऑफिस, दूरदर्शन रिले केंद्र, 6 लेन हाई वे, ऑडिटोरियम, जू, संग्रहालय, रोपवे, फ्लाई ओवर ब्रिज, रिंगरोड, हाट बाजार, मॉल, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलीटेक्निक कॉलेज, अच्छी सड़के, मनोरंजन पार्क आदि भिंड में नही है। 
 

    हमे इस बात को समझना चाहिए कि भिंड शहर में नही तो भिंड जिले में कहीं तो कुछ अच्छा हो रहा है। अगर हम ऐसे ही अटेर-आलमपुर, मिहोना-मेहगांव, अकोड़ा-अमायन, गोहद-गोरमी के आपसी खींचतान में उलझे रहे तो बाजी कोई दूसरा मार ले जाएगा।
     एक ख़ास बात और बता दूं कि भिंड जिले में प्रस्तावित हुआ इंडस्ट्रियल एरिया को मालनपुर ने किसी से छीना नही था बल्कि उसे उसकी लोकेशन का फायदा मिला था क्योंकि- ग्वालियर से नजदीकी की बजह से रोड और रेल मार्ग की सुगमता, बिजली हेतु 132kv लाइन की पहुंच, पानी हेतु नहर, कर्मचारी और अधिकारी आवास हेतु ग्वालियर में व्यवस्था, सरकारी जमीन की उपलब्धता, सुरक्षा की दृष्टि से उस समय भिंड दस्यु प्रभावित जिला था तो फैक्ट्री मालिक भिंड में इंडस्ट्री लगाने को तैयार नहीं हुए थे इसलिए इन सब कारणों से मालनपुर को चुना गया था। 
    भिंड जिले की सीमा के अंतिम पर छोर बसे सभी गांव अगर भिंड जिले के लिए खास नहीं माने तो भिंड का अस्तित्व ही क्या रहेगा? दबोह, मछंड, अटेर, असवार, कोट, चितोरा, एंडोरी, मालनपुर, छान, अंतियनपुरा, गुर्यायची, हरीक्षा, रूरई, मालनपुर आदि जगह भिंड जिले के अहम हिस्से है। जैसे यूपी वालो के लिए अंतिम छोर पर बसे नोएडा (दिल्ली बॉर्डर),  झांसी (एमपी बॉर्डर), आगरा (राजस्थान बॉर्डर) आदि सभी शहर बेहद खास हैं वैसे ही भिण्ड जिले की सीमा में बसा हर गांव भिंड के लिए खास है। जैसे बेटा चाहे छोटा हो, बड़ा हो या मझला हो सभी अपनी मां के लिए प्रिय होते है। 

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Mandu मांडू

मांडू का पुराना नाम मांडव है, जो मध्यप्रदेश के धार जिले मे स्थित एक प्राचीन गाँव है| मांडू मालवा के पठार पर स्थित है जिसकी समुद्रतल से ऊँचाई करीब 2 हजार फीट है| मान्डव के दक्षिण दिशा मे निमाड क्षेत्र का विस्तार है| बुंदेलखंड के वीर योद्धा आल्हा ऊदल ने इसी जगह आकर युद्ध किया था, जिसे इतिहास मे माड़ौगढ की लड़ाई के नाम से जाना जाता है| 10वी सदी मे परमार वंश के शासको ने सर्वप्रथम मांडू को अपनी राजधानी बनाया था | परमार वंश के प्रतापी राजा जयवर्मन और भोजराज हुए, नीलकंठ महादेव मंदिर उसी काल का बना है | जिनमे राजा भोजराज ने मांडू से दूर अन्य जगह झीलो के किनारे अपनी नई राजधानी बनाई, जिसका बाद मे नाम भोपाल पडा |    13वी सदी मे मांडू पर मुगलो ने कब्जा कर लिया था | ग्यासुद्दीन और बाजबहादुर के काल मे यहाँ अनेक महल और किले बनवाये गये इसलिये मांडू को किलो की नगरी कहते है| बाद मे मांडव इन्दौर की मराठा रियासत के अधिपत्य मे आ गया था | दिल्ली दरवाजा, जहाँगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा इस नगर के प्रमुख प्रवेश द्वार है     मांडू एक छोटा सा, कम आबादी वाला विस्त्रत क्षेत्रफल मे ...

भिन्ड (Bhind)

उत्तरी मध्यप्रदेश मे राजस्थान और उ.प्र. राज्य की सीमाओ को छूता हुआ भिन्ड जिला है, जो कि चम्बल सम्भाग के अन्तर्गत मुरेना, दतिया, ग्वालियर, जालौन, इटावा आदि जिलो का पडोसी जिला है|    भिन्ड जिला कभी दस्यू प्रभावित इलाका था, यहाँ के बीहडो मे डाकूओ का पनाह होता था| आज भी भिन्ड मे बंदूक चलाने वालो के शौक मे कमी नही हुई, आज भी यहाँ संख्या मे भारत की सबसे ज्यादा लायसेंसी बंदूके है| यहाँ की युवा पीढी अब सेना मे जाकर बीहडो की बजाय सरहदो पर दुशमनो के होश उडाती है|    भौगोलिक नजर से यहाँ कि ज्यादातर भूमि समतल और उपजाऊ है, चम्बल और सिन्ध यहाँ की प्रमुख नदिया है| खेती प्रधान जिला होने के साथ साथ भिन्ड औधोगिक और पर्यटन की द्रश्टि से भी बहुत खास है|    मालनपुर यहाँ का इंडस्ट्रियल क्षेत्र है, जहाँ पर कई अन्तराष्ट्रीय स्तर के कारखाने स्थापित है, जो उत्पादन और रोजगार के नजरिये से बहुत मायने रखते है|    प्रशासनिक रूप से जिले को 8 तेहसीलो मे विभक्त किया गया है-: भिन्ड, लहार, गोहद, मेहगाँव, मिहोना, रौन, अटेर और गोरमी है| तथा जिले के अन्य कस्बो मे मौ, दबोह, अमायन,...

Handia - Nemawar

हंडिया और नेमावर कस्बे नर्मदा नदी के तट पर आमने सामने दो अलग अलग ज़िलो में बसे हुए है, जो नदी पर बने एक पुल द्वारा जुडे है| यह स्थान इन्दौर रोड पर हरदा से 20km की दूरी पर है| हँडिया कस्बा हरदा जिले में जबकि नेमावर कस्बा देवास जिले में पड़ता है| * Handia -     मुगलकाल मे हन्डिया एक प्रमुख व्यापारिक स्थान था, बाद मे ये सिन्धिया रियासत का हिस्सा रहा| अकबर के नौरत्नो मे एक बजीर मुल्ला दो प्याजा की मजार यही है| हंडिया से 2km दूर 3 ऊंचे टीले पर प्राचीन मनमोहक तेली की सराय बनी है, जो अब खंडहर सी हो चुकी है| हंडिया मे नर्मदा किनारे प्राचीन रिद्धनाथ महादेव जी का मंदिर निर्मित है|   * Nemawar > नेमावर मे नदी किनारे एक छोटी पहाडी पर बहुत प्राचीन सिद्धनाथ महादेव जी का भव्य, अलौकिक विशाल मंदिर बना हुआ है| मान्यता है कि इस सिद्धनाथ मंदिर का निर्माण महाभारत कालीन है| नेमावर कस्बा नर्मदा जी का नाभि स्थान कहलाता है क्योंकि यह जगह नर्मदा नदी का मध्य स्थान है| नेमावर एक धार्मिक और शान्त मनमोहक नगर है| यह नगर जैन सिद्ध क्षेत्र भी है क्योंकि यहाँ कई प्राचीन कालीन जै...