सांची, भोपाल - विदिशा रेलखंड पर स्थित है। सड़क मार्ग या रेल से सांची स्तूप को देख सकते हैं जो अत्यधिक हरियाली के बीच स्पष्ट दिखाई पड़ता है। यह स्तूप पहाड़ी पर स्थित है।
सम्राट अशोक ने इन स्तूपो को बनवाया था, जो बौद्ध धर्म का प्रवर्तक स्थान कहा जा सकता है। यह स्थान पवित्र
माना जाता था कि इनमें से अनेक भिक्षु यहीं रहना चाहते थे। आज यह स्थान विश्व धरोहर सूची मे शामिल है, सांची मध्यप्रदेश के रायसेन जिले मे है |
मांडू का पुराना नाम मांडव है, जो मध्यप्रदेश के धार जिले मे स्थित एक प्राचीन गाँव है| मांडू मालवा के पठार पर स्थित है जिसकी समुद्रतल से ऊँचाई करीब 2 हजार फीट है| मान्डव के दक्षिण दिशा मे निमाड क्षेत्र का विस्तार है| बुंदेलखंड के वीर योद्धा आल्हा ऊदल ने इसी जगह आकर युद्ध किया था, जिसे इतिहास मे माड़ौगढ की लड़ाई के नाम से जाना जाता है| 10वी सदी मे परमार वंश के शासको ने सर्वप्रथम मांडू को अपनी राजधानी बनाया था | परमार वंश के प्रतापी राजा जयवर्मन और भोजराज हुए, नीलकंठ महादेव मंदिर उसी काल का बना है | जिनमे राजा भोजराज ने मांडू से दूर अन्य जगह झीलो के किनारे अपनी नई राजधानी बनाई, जिसका बाद मे नाम भोपाल पडा | 13वी सदी मे मांडू पर मुगलो ने कब्जा कर लिया था | ग्यासुद्दीन और बाजबहादुर के काल मे यहाँ अनेक महल और किले बनवाये गये इसलिये मांडू को किलो की नगरी कहते है| बाद मे मांडव इन्दौर की मराठा रियासत के अधिपत्य मे आ गया था | दिल्ली दरवाजा, जहाँगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा इस नगर के प्रमुख प्रवेश द्वार है मांडू एक छोटा सा, कम आबादी वाला विस्त्रत क्षेत्रफल मे ...