MadhyaPradesh is the Second Area wise Largest State of India. It is Situated at Central in India. How many Forest centuary and Historical place are in MP. Bhopal is the Capital and Indore, Jabalpur, Gwalior and Ujjain are Muncipal City of MP state.
हंडिया और नेमावर कस्बे नर्मदा नदी के तट पर आमने सामने दो अलग अलग ज़िलो में बसे हुए है, जो नदी पर बने एक पुल द्वारा जुडे है| यह स्थान इन्दौर रोड पर हरदा से 20km की दूरी पर है| हँडिया कस्बा हरदा जिले में जबकि नेमावर कस्बा देवास जिले में पड़ता है| * Handia - मुगलकाल मे हन्डिया एक प्रमुख व्यापारिक स्थान था, बाद मे ये सिन्धिया रियासत का हिस्सा रहा| अकबर के नौरत्नो मे एक बजीर मुल्ला दो प्याजा की मजार यही है| हंडिया से 2km दूर 3 ऊंचे टीले पर प्राचीन मनमोहक तेली की सराय बनी है, जो अब खंडहर सी हो चुकी है| हंडिया मे नर्मदा किनारे प्राचीन रिद्धनाथ महादेव जी का मंदिर निर्मित है| * Nemawar > नेमावर मे नदी किनारे एक छोटी पहाडी पर बहुत प्राचीन सिद्धनाथ महादेव जी का भव्य, अलौकिक विशाल मंदिर बना हुआ है| मान्यता है कि इस सिद्धनाथ मंदिर का निर्माण महाभारत कालीन है| नेमावर कस्बा नर्मदा जी का नाभि स्थान कहलाता है क्योंकि यह जगह नर्मदा नदी का मध्य स्थान है| नेमावर एक धार्मिक और शान्त मनमोहक नगर है| यह नगर जैन सिद्ध क्षेत्र भी है क्योंकि यहाँ कई प्राचीन कालीन जै...
स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में मध्यप्रदेश के चार शहर टॉप20 में शामिल हुए हैं। जिसमें पहले नंबर पर इंदौर, सातवें नंबर पर भोपाल, 15वें पर ग्वालियर और 20वें पर जबलपुर रहा है। इंदौर ने लगातार पांचवीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड पाया है। तथा मध्यप्रदेश देश का तीसरा सबसे स्वच्छ राज्य चुना गया। विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत मध्यप्रदेश को कुल 31 अवार्ड प्राप्त हुए हैं। धार्मिक नगरी उज्जैन भी देश का दसवां सबसे स्वच्छ शहर बनकर उभरा, उज्जैन के साथ ग्वालियर को भी 3 स्टार रेटिंग मिली है। इसके अलावा पचमढ़ी, देवास, होशंगाबाद, बड़वाह को क्लीन अवार्ड से नवाजा गया। मध्यप्रदेश के प्रतियोगी शहरों में से इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर तो भिंड प्रदेश का सबसे गंदा शहर बना। एमपी के एक शहर को 5* स्टार, नौ को 3* स्टार और 17 को 1* स्टार रेटिंग प्राप्त हुई है।
अक्सर कुछ लोगों को #शिकायत रहती हैं कि #मालनपुर ओद्योगिक क्षेत्र का लाभ भिंड जिले को नहीं मिलता है। इसी मुद्दे का लाभ उठाकर क्षेत्रीय नेता भी भेदभाव दिखाकर लोगो को बरगलाते है। सच तो ये है कि असल में भिंड शहर का स्थानीय नेता मालनपुर के विकास से जलता है। क्योंकि भिंड विधानसभा से निकला नेता भिंड क्षेत्र में कोई खास विकास के काम करवा नही पाया। जैसे कि फैक्ट्री, मेडिकल कालेज, यूनिवर्सिटी, सेंट्रल या राज्य का कोई हेड ऑफिस, दूरदर्शन रिले केंद्र, 6 लेन हाई वे, ऑडिटोरियम, जू, संग्रहालय, रोपवे, फ्लाई ओवर ब्रिज, रिंगरोड, हाट बाजार, मॉल, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलीटेक्निक कॉलेज, अच्छी सड़के, मनोरंजन पार्क आदि भिंड में नही है। हमे इस बात को समझना चाहिए कि भिंड शहर में नही तो भिंड जिले में कहीं तो कुछ अच्छा हो रहा है। अगर हम ऐसे ही अटेर-आलमपुर, मिहोना-मेहगांव, अकोड़ा-अमायन, गोहद-गोरमी के आपसी खींचतान में उलझे रहे तो बाजी कोई दूसरा मार ले जाएगा। एक ख़ास बात और बता दूं कि भिंड जिले में प्रस्तावित हुआ इंडस्ट्रियल एरिया को मालनपुर ने किसी से छीना नही...
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