"बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ" का मुख्य उद्देश्य लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करना है ताकि समाज में महिलाओं को समानता का भाव मिले। तथा बेटियों की शिक्षा पर जोर देकर बालिकाओं को रोजगार प्रदान करना और कार्यकुशलता में उनकी भागीदारी बढ़ाना है। ताकि महिलाओं के आत्मबल के आधार पर वे स्वयं सशक्त हो सके। इसी क्रम में ही छात्राओं की पढ़ाई के लिए देश के हर जिले में कुछ कन्या स्कूल और महाविद्यालय खोले गए है और उनके आवास व्यवस्था हेतु कुछ आवासीय विद्यालय भी संचालित है। सरकार भी बेटियों की पढ़ाई का सुचारू रूप से प्रबंध कर रही है और उनकी सुरक्षा को देखते हुए नए कानून भी पारित कर चुकी है।
मांडू का पुराना नाम मांडव है, जो मध्यप्रदेश के धार जिले मे स्थित एक प्राचीन गाँव है| मांडू मालवा के पठार पर स्थित है जिसकी समुद्रतल से ऊँचाई करीब 2 हजार फीट है| मान्डव के दक्षिण दिशा मे निमाड क्षेत्र का विस्तार है| बुंदेलखंड के वीर योद्धा आल्हा ऊदल ने इसी जगह आकर युद्ध किया था, जिसे इतिहास मे माड़ौगढ की लड़ाई के नाम से जाना जाता है| 10वी सदी मे परमार वंश के शासको ने सर्वप्रथम मांडू को अपनी राजधानी बनाया था | परमार वंश के प्रतापी राजा जयवर्मन और भोजराज हुए, नीलकंठ महादेव मंदिर उसी काल का बना है | जिनमे राजा भोजराज ने मांडू से दूर अन्य जगह झीलो के किनारे अपनी नई राजधानी बनाई, जिसका बाद मे नाम भोपाल पडा | 13वी सदी मे मांडू पर मुगलो ने कब्जा कर लिया था | ग्यासुद्दीन और बाजबहादुर के काल मे यहाँ अनेक महल और किले बनवाये गये इसलिये मांडू को किलो की नगरी कहते है| बाद मे मांडव इन्दौर की मराठा रियासत के अधिपत्य मे आ गया था | दिल्ली दरवाजा, जहाँगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा इस नगर के प्रमुख प्रवेश द्वार है मांडू एक छोटा सा, कम आबादी वाला विस्त्रत क्षेत्रफल मे ...
