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जालौन : बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरोहर, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम

उत्तरप्रदेश पर्यटन / UP TOURISM

Jalon Diatrict: एक परिचय 

उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित जालौन जिला इतिहास, संस्कृति, धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम है। इसका मुख्यालय उरई शहर में स्थित है। मध्यप्रदेश की सीमा से लगा यह क्षेत्र सदियों पुरानी सभ्यता, वीरता, संत परंपरा और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। यहां बहने वाली यमुना, बेतवा, पहूज, कुंवारी और सिंध जैसी नदिया इस धरती को उर्वर और आध्यात्मिक महत्व प्रदान करती हैं।

   जालौन जिले के प्राचीन किले, मंदिर, घाट, स्मारक और ग्रामीण संस्कृति हर आगंतुकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।




ऐतिहासिक महत्व

जालौन उरई का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है। यह क्षेत्र कभी चंदेल, बुंदेला और मराठा शासकों के प्रभाव में रहा। कालपी नगर का उल्लेख महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने यहाँ तपस्या की थी। वहीं मुगल दरबार के प्रसिद्ध नवरत्न बीरबल की जन्मस्थली भी कालपी को माना जाता है। 1857 की क्रांति के दौरान भी जालौन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
प्रवेश द्वार 



Jaloun's Tourist Places 

(1) Kalpi 

कालपी नगर यमुना नदी के किनारे बसा है जो धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विश्व प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कागज उद्योग कालपी का हैंडमेड पेपर उद्योग आज भी अपनी विशेष पहचान रखता है। 

कालपी के प्रमुख आकर्षण=
महर्षि वेदव्यास की तपोस्थली, यमुना घाट और और मंदिर, लंका मीनार,

(2) पचनदा संगम

पाँच नदियों का पवित्र मिलन
पचनदा जालौन जिले का अत्यंत प्रसिद्ध धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। यहाँ पाँच नदिया यमुना, चंबल, सिंध, पहूज और कुंवारी एक साथ मिलती हैं।
यह स्थान आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहाँ विशाल मेला का आयोजन होता है।

(3) जगम्मनपुर किला

(4) चौरासी गुंबद

(5) रामपुरा फोर्ट 

(6) कर्ण खेरा 

कैसे पहुँचे?

सड़क मार्ग

जालौन जिला उत्तरप्रदेश के हमीरपुर, कानपुर और मध्यप्रदेश के भिण्ड, मिहोना, लहार, दतिया और ग्वालियर आदि शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग

यहां के प्रमुख रेलवे स्टेशन उरई, कालपी और कोंच हैं, जहाँ से कानपुर, झांसी और ग्वालियर जैसे शहरों के लिए रेल सेवाए उपलब्ध हैं।

interested

Mandu मांडू

मांडू का पुराना नाम मांडव है, जो मध्यप्रदेश के धार जिले मे स्थित एक प्राचीन गाँव है| मांडू मालवा के पठार पर स्थित है जिसकी समुद्रतल से ऊँचाई करीब 2 हजार फीट है| मान्डव के दक्षिण दिशा मे निमाड क्षेत्र का विस्तार है| बुंदेलखंड के वीर योद्धा आल्हा ऊदल ने इसी जगह आकर युद्ध किया था, जिसे इतिहास मे माड़ौगढ की लड़ाई के नाम से जाना जाता है| 10वी सदी मे परमार वंश के शासको ने सर्वप्रथम मांडू को अपनी राजधानी बनाया था | परमार वंश के प्रतापी राजा जयवर्मन और भोजराज हुए, नीलकंठ महादेव मंदिर उसी काल का बना है | जिनमे राजा भोजराज ने मांडू से दूर अन्य जगह झीलो के किनारे अपनी नई राजधानी बनाई, जिसका बाद मे नाम भोपाल पडा |    13वी सदी मे मांडू पर मुगलो ने कब्जा कर लिया था | ग्यासुद्दीन और बाजबहादुर के काल मे यहाँ अनेक महल और किले बनवाये गये इसलिये मांडू को किलो की नगरी कहते है| बाद मे मांडव इन्दौर की मराठा रियासत के अधिपत्य मे आ गया था | दिल्ली दरवाजा, जहाँगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा इस नगर के प्रमुख प्रवेश द्वार है     मांडू एक छोटा सा, कम आबादी वाला विस्त्रत क्षेत्रफल मे ...

भिन्ड (Bhind)

उत्तरी मध्यप्रदेश मे राजस्थान और उ.प्र. राज्य की सीमाओ को छूता हुआ भिन्ड जिला है, जो कि चम्बल सम्भाग के अन्तर्गत मुरेना, दतिया, ग्वालियर, जालौन, इटावा आदि जिलो का पडोसी जिला है|    भिन्ड जिला कभी दस्यू प्रभावित इलाका था, यहाँ के बीहडो मे डाकूओ का पनाह होता था| आज भी भिन्ड मे बंदूक चलाने वालो के शौक मे कमी नही हुई, आज भी यहाँ संख्या मे भारत की सबसे ज्यादा लायसेंसी बंदूके है| यहाँ की युवा पीढी अब सेना मे जाकर बीहडो की बजाय सरहदो पर दुशमनो के होश उडाती है|    भौगोलिक नजर से यहाँ कि ज्यादातर भूमि समतल और उपजाऊ है, चम्बल और सिन्ध यहाँ की प्रमुख नदिया है| खेती प्रधान जिला होने के साथ साथ भिन्ड औधोगिक और पर्यटन की द्रश्टि से भी बहुत खास है|    मालनपुर यहाँ का इंडस्ट्रियल क्षेत्र है, जहाँ पर कई अन्तराष्ट्रीय स्तर के कारखाने स्थापित है, जो उत्पादन और रोजगार के नजरिये से बहुत मायने रखते है|    प्रशासनिक रूप से जिले को 8 तेहसीलो मे विभक्त किया गया है-: भिन्ड, लहार, गोहद, मेहगाँव, मिहोना, रौन, अटेर और गोरमी है| तथा जिले के अन्य कस्बो मे मौ, दबोह, अमायन,...

Handia - Nemawar

हंडिया और नेमावर कस्बे नर्मदा नदी के तट पर आमने सामने दो अलग अलग ज़िलो में बसे हुए है, जो नदी पर बने एक पुल द्वारा जुडे है| यह स्थान इन्दौर रोड पर हरदा से 20km की दूरी पर है| हँडिया कस्बा हरदा जिले में जबकि नेमावर कस्बा देवास जिले में पड़ता है| * Handia -     मुगलकाल मे हन्डिया एक प्रमुख व्यापारिक स्थान था, बाद मे ये सिन्धिया रियासत का हिस्सा रहा| अकबर के नौरत्नो मे एक बजीर मुल्ला दो प्याजा की मजार यही है| हंडिया से 2km दूर 3 ऊंचे टीले पर प्राचीन मनमोहक तेली की सराय बनी है, जो अब खंडहर सी हो चुकी है| हंडिया मे नर्मदा किनारे प्राचीन रिद्धनाथ महादेव जी का मंदिर निर्मित है|   * Nemawar > नेमावर मे नदी किनारे एक छोटी पहाडी पर बहुत प्राचीन सिद्धनाथ महादेव जी का भव्य, अलौकिक विशाल मंदिर बना हुआ है| मान्यता है कि इस सिद्धनाथ मंदिर का निर्माण महाभारत कालीन है| नेमावर कस्बा नर्मदा जी का नाभि स्थान कहलाता है क्योंकि यह जगह नर्मदा नदी का मध्य स्थान है| नेमावर एक धार्मिक और शान्त मनमोहक नगर है| यह नगर जैन सिद्ध क्षेत्र भी है क्योंकि यहाँ कई प्राचीन कालीन जै...