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Datiya दतिया

दतिया जिला मध्यप्रदेश के ग्वालियर सम्भाग मे उत्तरप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है | दतिया जिले की पडोसी सीमा मे भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, झाँसी और जालौन जिले लगते है| सिन्ध और पहुज नदिया जिले मे होकर बहती है| क्षेत्रफल की दृष्टि से दतिया राज्य का सबसे छोटा जिला है| दतिया पुरातन काल मे दंतबक्त्र की राजधानी थी | जिले मे तीन तेहसीले दतिया, सेवढा और भांडेर है| इन्दरगढ इस जिले का चौथा बड़ा कस्बा है| जिले मे मुख्यत: गेहू, दलहन, बाजरा, ज्वार की फसले होती है|
     दतिया प्राचीन कालीन बुन्देलखंड रियासत का प्रमुख राज्य था | दतिया मे राजा बीरसिंह जूदेव ने अपने काल (17वी सदी) मे महल, बाग, तालाब और अनेक मंदिरो का निर्माण करवाया था | इसके अलावा जिले मे अनेक महत्तवपूर्ण पर्यटन स्थान है, जहाँ बडी संख्या मे लोग आते है |

* TOUR -:
1. वीरसिंह महल =
दतिया शहर मे एक पहाडी पर सतखंडा महल बना है जो स्वास्तिक के आकार मे पत्थरो से बना है | इसके निर्माण मे लकडी और लोहे का उपयोग नही किया गया है| यहाँ कई सुंदर छत्रिया भी निर्मित है| महल मे भित्ति चित्र, मूर्तिया प्रमुख आकर्षण का केंद्र है| यह महल दतिया शहर के किनारे पर करण सागर के पास बना है | बरसात मे यहाँ का नजारा ज्यादा प्यारा लगता है |

2. पीताम्बरा माता मंदिर =
भारत मे माता के शक्तिपीठो मे से एक प्रमुख मंदिर दतिया मे है| यह जगह ज्योतिष और तांत्रिक साधना के लिये प्रसिद्ध है | यहाँ बगुलामुखी देवी और धूमावती देवी के मंदिर मे प्रत्येक शनिवार को हजारो श्रद्धालु आते है |

3. राजगढ संग्रहालय =
राजा शत्रुजीत बुन्देला ने इस महल का निर्माण करवाया था, यहाँ आप पुरातन चीजो को देख सकते है | यह संग्रहालय पीताम्बरा मंदिर के पास मे है |

4. दतिया शहर के अन्य प्रमुख मंदिर=
मड़िया महादेव मंदिर,  अवध बिहारी मंदिर, विजय राघव मंदिर, गोपाल मंदिर आदि |

5. सोनगिरि =
दतिया से 15 Km दूर एक पहाडी पर सैकडो मंदिर बने है, यह स्थान दिगम्बर सम्प्रदाय का पवित्र तीर्थ स्थल है| यहाँ भगवान चन्द्रप्रभु, पार्श्वनाथ, शीतलनाथ के भव्य मंदिर और विशाल मूर्तिया बनी है | होली के समय यहाँ धार्मिक मेला लगता है|

6. रतनगढ माता मंदिर=
दतिया से 65km दूर भगुआपुरा गाँव के पास सिन्ध नदी किनारे माता रतनगढ वाली और कुँवर देव का मंदिर है| यह स्थान सर्पदंश से पीडितो के इलाज हेतु भारत वर्ष मे प्रसिद्ध है| दीपावली पर यहाँ धार्मिक मेला लगता है|

7. सनकुआ =
सेवढा कस्बे मे यह धार्मिक स्थान सिन्ध नदी पर बने मंदिरो, किला, गुफा और जलप्रपात के लिये प्रसिद्ध है|

8. बालाजी मंदिर =
जिले का एक मात्र सूर्यमंदिर उनाव गाँव मे है, जो दतिया से 17km दूर है| यहाँ मंदिर के तालाब मे नहाने से त्वचा रोग मिट जाते है |

9. बड़ौनी =
दतिया से 10km दूर बुन्देल कालीन बौद्ध और जैन धर्म से संबंधित मंदिरो, मूर्तियो और हवेली के लिये यह स्थान प्रसिद्ध है |

* Travels =
Rail =
दतिया और सोनगिरि मे स्टेशन है, जो झाँसी - ग्वालियर रेलवे खंड के बीच पड़ते है |

Bus =
दतिया और सेवढा के लिये ग्वालियर, झाँसी से नियमित बस सेवा है|

airoplan =
नजदीकतम हवाईअड्डा ग्वालियर शहर मे है |

*Weather
सितम्बर, अक्टूबर, नवम्बर, और मार्च मे मौसम अनुकूल रहता है |

*Hotel =
दतिया, झाँसी, ग्वालियर मे होटल और सोनगिरि मे रुकने को धर्मशालाये है |

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Mandu मांडू

मांडू का पुराना नाम मांडव है, जो मध्यप्रदेश के धार जिले मे स्थित एक प्राचीन गाँव है| मांडू मालवा के पठार पर स्थित है जिसकी समुद्रतल से ऊँचाई करीब 2 हजार फीट है| मान्डव के दक्षिण दिशा मे निमाड क्षेत्र का विस्तार है| बुंदेलखंड के वीर योद्धा आल्हा ऊदल ने इसी जगह आकर युद्ध किया था, जिसे इतिहास मे माड़ौगढ की लड़ाई के नाम से जाना जाता है| 10वी सदी मे परमार वंश के शासको ने सर्वप्रथम मांडू को अपनी राजधानी बनाया था | परमार वंश के प्रतापी राजा जयवर्मन और भोजराज हुए, नीलकंठ महादेव मंदिर उसी काल का बना है | जिनमे राजा भोजराज ने मांडू से दूर अन्य जगह झीलो के किनारे अपनी नई राजधानी बनाई, जिसका बाद मे नाम भोपाल पडा |    13वी सदी मे मांडू पर मुगलो ने कब्जा कर लिया था | ग्यासुद्दीन और बाजबहादुर के काल मे यहाँ अनेक महल और किले बनवाये गये इसलिये मांडू को किलो की नगरी कहते है| बाद मे मांडव इन्दौर की मराठा रियासत के अधिपत्य मे आ गया था | दिल्ली दरवाजा, जहाँगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा इस नगर के प्रमुख प्रवेश द्वार है     मांडू एक छोटा सा, कम आबादी वाला विस्त्रत क्षेत्रफल मे ...

भिन्ड (Bhind)

उत्तरी मध्यप्रदेश मे राजस्थान और उ.प्र. राज्य की सीमाओ को छूता हुआ भिन्ड जिला है, जो कि चम्बल सम्भाग के अन्तर्गत मुरेना, दतिया, ग्वालियर, जालौन, इटावा आदि जिलो का पडोसी जिला है|    भिन्ड जिला कभी दस्यू प्रभावित इलाका था, यहाँ के बीहडो मे डाकूओ का पनाह होता था| आज भी भिन्ड मे बंदूक चलाने वालो के शौक मे कमी नही हुई, आज भी यहाँ संख्या मे भारत की सबसे ज्यादा लायसेंसी बंदूके है| यहाँ की युवा पीढी अब सेना मे जाकर बीहडो की बजाय सरहदो पर दुशमनो के होश उडाती है|    भौगोलिक नजर से यहाँ कि ज्यादातर भूमि समतल और उपजाऊ है, चम्बल और सिन्ध यहाँ की प्रमुख नदिया है| खेती प्रधान जिला होने के साथ साथ भिन्ड औधोगिक और पर्यटन की द्रश्टि से भी बहुत खास है|    मालनपुर यहाँ का इंडस्ट्रियल क्षेत्र है, जहाँ पर कई अन्तराष्ट्रीय स्तर के कारखाने स्थापित है, जो उत्पादन और रोजगार के नजरिये से बहुत मायने रखते है|    प्रशासनिक रूप से जिले को 8 तेहसीलो मे विभक्त किया गया है-: भिन्ड, लहार, गोहद, मेहगाँव, मिहोना, रौन, अटेर और गोरमी है| तथा जिले के अन्य कस्बो मे मौ, दबोह, अमायन,...

Handia - Nemawar

हंडिया और नेमावर कस्बे नर्मदा नदी के तट पर आमने सामने दो अलग अलग ज़िलो में बसे हुए है, जो नदी पर बने एक पुल द्वारा जुडे है| यह स्थान इन्दौर रोड पर हरदा से 20km की दूरी पर है| हँडिया कस्बा हरदा जिले में जबकि नेमावर कस्बा देवास जिले में पड़ता है| * Handia -     मुगलकाल मे हन्डिया एक प्रमुख व्यापारिक स्थान था, बाद मे ये सिन्धिया रियासत का हिस्सा रहा| अकबर के नौरत्नो मे एक बजीर मुल्ला दो प्याजा की मजार यही है| हंडिया से 2km दूर 3 ऊंचे टीले पर प्राचीन मनमोहक तेली की सराय बनी है, जो अब खंडहर सी हो चुकी है| हंडिया मे नर्मदा किनारे प्राचीन रिद्धनाथ महादेव जी का मंदिर निर्मित है|   * Nemawar > नेमावर मे नदी किनारे एक छोटी पहाडी पर बहुत प्राचीन सिद्धनाथ महादेव जी का भव्य, अलौकिक विशाल मंदिर बना हुआ है| मान्यता है कि इस सिद्धनाथ मंदिर का निर्माण महाभारत कालीन है| नेमावर कस्बा नर्मदा जी का नाभि स्थान कहलाता है क्योंकि यह जगह नर्मदा नदी का मध्य स्थान है| नेमावर एक धार्मिक और शान्त मनमोहक नगर है| यह नगर जैन सिद्ध क्षेत्र भी है क्योंकि यहाँ कई प्राचीन कालीन जै...