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चित्रकूट (Chitrakoot)

चित्रकूट मध्यप्रदेश के सतना जिले मे उत्त्तरप्रदेश की सीमा के पास स्थित है | चित्रकूट मंदाकिनी नदी किनारे, विन्ध्य पर्वत श्रंखला पर स्थित एक धार्मिक और रामायण कालीन एतिह...

Handia - Nemawar

हंडिया और नेमावर कस्बे नर्मदा नदी के तट पर आमने सामने दो अलग अलग ज़िलो में बसे हुए है, जो नदी पर बने एक पुल द्वारा जुडे है| यह स्थान इन्दौर रोड पर हरदा से 20km की दूरी पर है| हँडिया कस्बा हरदा जिले में जबकि नेमावर कस्बा देवास जिले में पड़ता है| * Handia -     मुगलकाल मे हन्डिया एक प्रमुख व्यापारिक स्थान था, बाद मे ये सिन्धिया रियासत का हिस्सा रहा| अकबर के नौरत्नो मे एक बजीर मुल्ला दो प्याजा की मजार यही है| हंडिया से 2km दूर 3 ऊंचे टीले पर प्राचीन मनमोहक तेली की सराय बनी है, जो अब खंडहर सी हो चुकी है| हंडिया मे नर्मदा किनारे प्राचीन रिद्धनाथ महादेव जी का मंदिर निर्मित है|   * Nemawar > नेमावर मे नदी किनारे एक छोटी पहाडी पर बहुत प्राचीन सिद्धनाथ महादेव जी का भव्य, अलौकिक विशाल मंदिर बना हुआ है| मान्यता है कि इस सिद्धनाथ मंदिर का निर्माण महाभारत कालीन है| नेमावर कस्बा नर्मदा जी का नाभि स्थान कहलाता है क्योंकि यह जगह नर्मदा नदी का मध्य स्थान है| नेमावर एक धार्मिक और शान्त मनमोहक नगर है| यह नगर जैन सिद्ध क्षेत्र भी है क्योंकि यहाँ कई प्राचीन कालीन जै...

खजराना गणेश मंदिर

खजराना इन्दौर शहर की एक जगह का नाम है, यहाँ स्थित गणेश भगवान का प्रसिद्ध मंदिर है| जो इन्दौर के अलावा पूरे देश मे श्रद्धालुओ के लिये प्रमुख विनायक मंदिर है | इस मंदिर का निर्म...

राजबाड़ा (indore)

मध्यप्रदेश के इन्दोर शहर की पहिचान राजबाडा एक एतिहासिक राजशाही इमारत है, जो होल्कर वंश की सत्ता का केंद्र रहा है |   आज आधुनिक शहर इन्दौर मे राजबाडा प्राचीनता की याद संजोये है, राजबाडे का पांच मंजिला भव्य दरवाजा लोगो को बर्बस ही अपनी ओर आकर्षित करता है | इसकी ऊपरी तीन मंजिल चूना, ईट और ज्यादातर लकडी के उपयोग से बनी है|      राजबाडे की चौकोर इमारत मे अंदर प्रवेश करते ही सामने की तरफ आँगन मे दो मंजिला पत्थरो से निर्मित भवन है, जो नीचे की तरफ आधार स्तम्भो और ऊपर सभा कक्ष के रूप मे बना है| ऊपर जाने के लिये पत्थरो की सीढीया बनी है, जहाँ से चौकोर राजबाडा का मनोहारी द्रश्य अच्छा लगता है| ऊपर ही एक बडे से कक्ष मे संग्रहालय बना है जिसमे होल्कर वंश की प्राचीन धरोहरे आप देख सकते है| राजबाडे के पीछे की ओर रियासत कालीन एक प्राचीन बडा सा मंदिर भी बना है|     राजबाडा आज इन्दौर की प्रमुख व्यवसायिक जगह बन चुका है, जिसके आसपास इन्दौर का प्रमुख बाज़ार स्थापित है| हजारो की संख्या मे लोग यहाँ खरीददारी करने आते है| आज इन्दौर एम.पी. की व्यवसायिक राजधानी है, तभी तो इ...

Bhopal (भोपाल)

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल मे दर्जनो छोटे बडे तालाब है, इसलिये इसे तालाबो का शहर कहाँ जाता है| भोपाल की नीव राजा भोजपाल ने डाली थी, भोपाल की प्राक्रतिक सुंदरता से वशीभूत हो...

भिन्ड (Bhind)

उत्तरी मध्यप्रदेश मे राजस्थान और उ.प्र. राज्य की सीमाओ को छूता हुआ भिन्ड जिला है, जो कि चम्बल सम्भाग के अन्तर्गत मुरेना, दतिया, ग्वालियर, जालौन, इटावा आदि जिलो का पडोसी जिला है|    भिन्ड जिला कभी दस्यू प्रभावित इलाका था, यहाँ के बीहडो मे डाकूओ का पनाह होता था| आज भी भिन्ड मे बंदूक चलाने वालो के शौक मे कमी नही हुई, आज भी यहाँ संख्या मे भारत की सबसे ज्यादा लायसेंसी बंदूके है| यहाँ की युवा पीढी अब सेना मे जाकर बीहडो की बजाय सरहदो पर दुशमनो के होश उडाती है|    भौगोलिक नजर से यहाँ कि ज्यादातर भूमि समतल और उपजाऊ है, चम्बल और सिन्ध यहाँ की प्रमुख नदिया है| खेती प्रधान जिला होने के साथ साथ भिन्ड औधोगिक और पर्यटन की द्रश्टि से भी बहुत खास है|    मालनपुर यहाँ का इंडस्ट्रियल क्षेत्र है, जहाँ पर कई अन्तराष्ट्रीय स्तर के कारखाने स्थापित है, जो उत्पादन और रोजगार के नजरिये से बहुत मायने रखते है|    प्रशासनिक रूप से जिले को 8 तेहसीलो मे विभक्त किया गया है-: भिन्ड, लहार, गोहद, मेहगाँव, मिहोना, रौन, अटेर और गोरमी है| तथा जिले के अन्य कस्बो मे मौ, दबोह, अमायन,...

उज्जैन (Ujjain)

भगवान महाकाल 'शिव जी' की नगरी उज्जैन का प्राचीन नाम अवन्तिका है, जो 16 प्रमुख जनपदो मे से एक थी| मध्यप्रदेश राज्य के प्रमुख धार्मिक नगर उज्जैन मे महाकाल शिव प्रभु का दक्षिणामुखी ज्योतिर्लिंग है, जहाँ सुबह भस्मारती होती है| मंदिर के पीछे, हरसिद्धि माता मंदिर की तरफ बड़ा तालाब है तथा उज्जैन मे क्षिप्रा नदी पर सिंहस्थ कुम्भ मेला लगता है| उज्जैन से कर्करेखा होकर गुजरती है इसलिये प्राचीन काल मेसमय गणना हेतु यहाँ वैधशाला की स्थापना की गई थी|    उज्जैन के प्रमुख शासको मे राजा विक्रमादित्य और सम्राट अशोक का नाम पहले आता है| काल गणना हेतु विक्रम सम्बत की शुरूआत और रचना महाराजा विक्रमादित्य के पुण्य करमो का ही फल है| अवन्तिका यानि उज्जैन मे संस्कृत के ग्याता और प्रसिद्ध कवि कालिदास का जन्म हुआ था, तभी तो इसका चौथा नाम कालिदास नगरी है|    उज्जैन के अन्य दर्शनीय स्थल-: * भैरवनाथ मंदिर (यहाँ प्रसाद के साथ मदिरा भी चढाई जाती है), * भत्रहरि गुफा, * गड़कालिका मंदिर, * मंगलनाथ मंदिर (मंगल ग्रह की दशा और शांति के लिये भक्त आते है), * चिंतामण गणेश मंदिर, * गोप...