देश की मौजूदा मोदी सरकार बीते सालो की अपेक्षा में आर्थिक और विकास मामलों में पिछड़ती नजर आईं और विदेश मामलों में भी अपने सहयोगी विदेशी सरकारों से रिश्ते नहीं निभा पाई। इस दरमियान नेपाल पर चीन की पकड़ मजबूत हुई और अफगानिस्तान पर तालिबानी आतंकवादियों का कब्जा हो गया। भारत सरकार से रक्षा की उम्मीद लगाए बैठे अफगानिस्तान के लाखों लोग आज मित्र राष्ट्र हिंदुस्तान के प्रयासों से नाखुश जरूर होंगे। भारत के मूक दर्शक बनने के कारण दुनिया के कई कमजोर लोकतांत्रिक देश भारत पर अपनी निर्भरता नहीं रखना चाहेंगे।
आजादी के 75वें साल में हम 10% विकास दर भी नहीं छू पाएं, कोरोना काल के मंजर के बाद देश भारी किल्लतो से जूझ रहा है। देश के अंदर बेरोजगारी बढ़ चुकी है, व्यापारी वर्ग कर्ज में डूबा है, मजदूर लाचार है, वेतन और अन्य भुगतान रुके पड़े है, बस और ट्रक मालिक दिवालिया हो गए, डीजल और पेट्रोल रिकॉर्ड महंगाई को पार कर गए है। इसके अलावा भाड़ा, किराया, गैस सिलेंडर, खाना, राशन आदि आवश्यक चीजें काफी महंगी हो गई है।
पिछले समय में दुनिया ने कोरॉना की गंभीर मार झेली तथा हाल ही में बाढ़ ने भी कई राज्यो में कोहराम मचाया। इसके बाद उत्पन्न विपत्तियों में आसानी से पार निकल जाना ही किसी सरकार की सफलता की कहानी सिद्ध करता है। परन्तु मुश्किल काल से निपटने के लिए भारत सरकार की व्यवस्थाएं नाकाम साबित हुई। लोगो को तत्काल रसद राहत तो मिली पर मुआवजा नहीं मिला। आज देश कमजोर और घटिया विपक्ष का दंश झेल रहा है क्योंकि मोदी सरकार इतनी अच्छी नहीं है परन्तु लोगो के पास कोई अच्छा पार्टी विकल्प भी नहीं है।