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ज्योतिरादित्य सिंधिया: King of Gwalior, Minister of parliament, Aviation Minister

मेरा मध्यप्रदेश

श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया 

• श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर स्टेट के वंशज है। ग्वालियर राजघराने के मराठा शाही परिवार के वंशज आज 'सिंधिया' कहलाते है।
ग्वालियर स्टेट की अंतिम महारानी राजमाता विजयाराजे सिंधिया थी, जिन्होंने जनसंघ की स्थापना की थी। इन्होंने ही श्री अटल बिहारी बाजपेई जी को पहली बार अपनी पार्टी से टिकट दिया था।
• ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता श्रीमंत माधवराव सिंधिया कांग्रेस के एक बड़े नेता थे। खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कांग्रेस सरकार में कई अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी निभा चुके है।
• वर्तमान मोदी सरकार में श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नागरिक उड्डयन मंत्री है।
• ज्योतिरादित्य सिंधिया आज मध्यप्रदेश के एक बड़े प्रभावशाली और लोकप्रिय नेता है। जिनके समर्थक ग्वालियर में ही नहीं अपितु मध्यप्रदेश के हर जिले में बड़ी संख्या में मिल जाएंगे।
• सिंधिया खानदान का भव्य निवास स्थान 'जयविलास महल' ग्वालियर में स्थित है। जिसके एक हिस्से में पर्यटन विभाग का म्यूजियम संचालित है।




• राजमाता की पुत्री वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी है। और उनकी छोटी पुत्री यशोधरा राजे सिंधिया मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री है।
• शिक्षित राजनेताओं में शुमार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक और एमबीए किया हुआ है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया
श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया


• ज्योतिरादित्य सिंधिया की ससुराल वड़ोदरा के गायकवाड़ राजपरिवार में है। उनकी पत्नी का नाम प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया है।
• ज्योतिरादित्य की माताश्री अम्मा महाराज माधवीराजे सिंधिया राजनीति से दूर रहना पसंद करती है।
• सिंधिया शासन (ग्वालियर स्टेट) की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिवपुरी में थी।
• ग्वालियर चंबल संभाग के अलावा भी मध्यप्रदेश की अनेक जगहों पर सिंधिया काल के निर्माण देखने को मिल जाएंगे।
• सिंधिया रियासत काल में बड़ी संख्या में अनेक वास्तुकला की इमारतें, तालाब, किला, महल, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे बनवाए गए थे।
• सिंधिया राजपरिवार के लोगो के नाम पर देश और प्रदेश में कई सरकारी चीजें संचालित हो रही है।

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Mandu मांडू

मांडू का पुराना नाम मांडव है, जो मध्यप्रदेश के धार जिले मे स्थित एक प्राचीन गाँव है| मांडू मालवा के पठार पर स्थित है जिसकी समुद्रतल से ऊँचाई करीब 2 हजार फीट है| मान्डव के दक्षिण दिशा मे निमाड क्षेत्र का विस्तार है| बुंदेलखंड के वीर योद्धा आल्हा ऊदल ने इसी जगह आकर युद्ध किया था, जिसे इतिहास मे माड़ौगढ की लड़ाई के नाम से जाना जाता है| 10वी सदी मे परमार वंश के शासको ने सर्वप्रथम मांडू को अपनी राजधानी बनाया था | परमार वंश के प्रतापी राजा जयवर्मन और भोजराज हुए, नीलकंठ महादेव मंदिर उसी काल का बना है | जिनमे राजा भोजराज ने मांडू से दूर अन्य जगह झीलो के किनारे अपनी नई राजधानी बनाई, जिसका बाद मे नाम भोपाल पडा |    13वी सदी मे मांडू पर मुगलो ने कब्जा कर लिया था | ग्यासुद्दीन और बाजबहादुर के काल मे यहाँ अनेक महल और किले बनवाये गये इसलिये मांडू को किलो की नगरी कहते है| बाद मे मांडव इन्दौर की मराठा रियासत के अधिपत्य मे आ गया था | दिल्ली दरवाजा, जहाँगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा इस नगर के प्रमुख प्रवेश द्वार है     मांडू एक छोटा सा, कम आबादी वाला विस्त्रत क्षेत्रफल मे ...

भिन्ड (Bhind)

उत्तरी मध्यप्रदेश मे राजस्थान और उ.प्र. राज्य की सीमाओ को छूता हुआ भिन्ड जिला है, जो कि चम्बल सम्भाग के अन्तर्गत मुरेना, दतिया, ग्वालियर, जालौन, इटावा आदि जिलो का पडोसी जिला है|    भिन्ड जिला कभी दस्यू प्रभावित इलाका था, यहाँ के बीहडो मे डाकूओ का पनाह होता था| आज भी भिन्ड मे बंदूक चलाने वालो के शौक मे कमी नही हुई, आज भी यहाँ संख्या मे भारत की सबसे ज्यादा लायसेंसी बंदूके है| यहाँ की युवा पीढी अब सेना मे जाकर बीहडो की बजाय सरहदो पर दुशमनो के होश उडाती है|    भौगोलिक नजर से यहाँ कि ज्यादातर भूमि समतल और उपजाऊ है, चम्बल और सिन्ध यहाँ की प्रमुख नदिया है| खेती प्रधान जिला होने के साथ साथ भिन्ड औधोगिक और पर्यटन की द्रश्टि से भी बहुत खास है|    मालनपुर यहाँ का इंडस्ट्रियल क्षेत्र है, जहाँ पर कई अन्तराष्ट्रीय स्तर के कारखाने स्थापित है, जो उत्पादन और रोजगार के नजरिये से बहुत मायने रखते है|    प्रशासनिक रूप से जिले को 8 तेहसीलो मे विभक्त किया गया है-: भिन्ड, लहार, गोहद, मेहगाँव, मिहोना, रौन, अटेर और गोरमी है| तथा जिले के अन्य कस्बो मे मौ, दबोह, अमायन,...

Handia - Nemawar

हंडिया और नेमावर कस्बे नर्मदा नदी के तट पर आमने सामने दो अलग अलग ज़िलो में बसे हुए है, जो नदी पर बने एक पुल द्वारा जुडे है| यह स्थान इन्दौर रोड पर हरदा से 20km की दूरी पर है| हँडिया कस्बा हरदा जिले में जबकि नेमावर कस्बा देवास जिले में पड़ता है| * Handia -     मुगलकाल मे हन्डिया एक प्रमुख व्यापारिक स्थान था, बाद मे ये सिन्धिया रियासत का हिस्सा रहा| अकबर के नौरत्नो मे एक बजीर मुल्ला दो प्याजा की मजार यही है| हंडिया से 2km दूर 3 ऊंचे टीले पर प्राचीन मनमोहक तेली की सराय बनी है, जो अब खंडहर सी हो चुकी है| हंडिया मे नर्मदा किनारे प्राचीन रिद्धनाथ महादेव जी का मंदिर निर्मित है|   * Nemawar > नेमावर मे नदी किनारे एक छोटी पहाडी पर बहुत प्राचीन सिद्धनाथ महादेव जी का भव्य, अलौकिक विशाल मंदिर बना हुआ है| मान्यता है कि इस सिद्धनाथ मंदिर का निर्माण महाभारत कालीन है| नेमावर कस्बा नर्मदा जी का नाभि स्थान कहलाता है क्योंकि यह जगह नर्मदा नदी का मध्य स्थान है| नेमावर एक धार्मिक और शान्त मनमोहक नगर है| यह नगर जैन सिद्ध क्षेत्र भी है क्योंकि यहाँ कई प्राचीन कालीन जै...