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omkareshwar ओमकारेश्वर

मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले मे देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतीर्लींगो में से एक ओंकारेश्वर मंदिर है। यह स्थान पवित्र धार्मिक स्थान होने के साथ ही अत्यंत रमणीय प्राक्रतिक स्थान है जो देश की पवित्र नदियों में से एक नर्मदा जी के द्वारा विभक्त 2 पहाड़ी तटो पर स्थित हैं | इसके एक तट पर ॐकारेश्वर मंदिर और दूसरे तट पर ममलेश्वर मंदिर है|ये दोनों किनारे पर आवागमन के लिए नर्मदा नदी पर एक पुल बनाया गया है, जो झूलता हुआ नजर आता है क्योंकि इसके बीच मे खम्बे नही है | यहां आकर मँधाता  पर्वत की परिक्रमा का विशेष महत्व है| इस पर्वत का नाम इछ्वाकु वंश के शिव भक्त राजा और मुचुकन्द के पिता मँधाता के नाम पर पड़ा, क्योंकि  उन्होने इसी पर्वत पर शिव जी की तपस्या की थी | यह पर्वत ओंकार के स्वरूप में दिखाई पड़ता है इसलिये इस जगह का नाम ओमकारेश्वर पड़ा|      प्रसाद के रूप में ओमकारेश्वर के शिव मंदिर में चने की दाल चढ़ावे की विशेष परंपरा है| यहां आकर  अनेको मंदिर, घाटों,  प्राकृतिक खूबसूरती को संजोए पर्वत और पास ही नर्मदा नदी पर बने बाँध आदि  के नजारे ज्यादा सुंदर दिखाई देते हैं। बोट...

Mandu मांडू

मांडू का पुराना नाम मांडव है, जो मध्यप्रदेश के धार जिले मे स्थित एक प्राचीन गाँव है| मांडू मालवा के पठार पर स्थित है जिसकी समुद्रतल से ऊँचाई करीब 2 हजार फीट है| मान्डव के दक्षिण दिशा मे निमाड क्षेत्र का विस्तार है| बुंदेलखंड के वीर योद्धा आल्हा ऊदल ने इसी जगह आकर युद्ध किया था, जिसे इतिहास मे माड़ौगढ की लड़ाई के नाम से जाना जाता है| 10वी सदी मे परमार वंश के शासको ने सर्वप्रथम मांडू को अपनी राजधानी बनाया था | परमार वंश के प्रतापी राजा जयवर्मन और भोजराज हुए, नीलकंठ महादेव मंदिर उसी काल का बना है | जिनमे राजा भोजराज ने मांडू से दूर अन्य जगह झीलो के किनारे अपनी नई राजधानी बनाई, जिसका बाद मे नाम भोपाल पडा |    13वी सदी मे मांडू पर मुगलो ने कब्जा कर लिया था | ग्यासुद्दीन और बाजबहादुर के काल मे यहाँ अनेक महल और किले बनवाये गये इसलिये मांडू को किलो की नगरी कहते है| बाद मे मांडव इन्दौर की मराठा रियासत के अधिपत्य मे आ गया था | दिल्ली दरवाजा, जहाँगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा इस नगर के प्रमुख प्रवेश द्वार है     मांडू एक छोटा सा, कम आबादी वाला विस्त्रत क्षेत्रफल मे ...

Gwalior City ग्वालियर शहर

ग्वालियर मध्यप्रदेश राज्य का चौथा बडा महानगर है | शहर की आवादी करीब 15 लाख है | कालांतर मे गुर्जर, प्रतिहार, तोमर और कछवाह राजपूतो ने ग्वालियर को अपनी राजधानी बनाया था | 15वी सदी के समय राजा मानसिंह तोमर के राजकाल मे यहाँ संगीत को बहुत बढावा मिला | अकबर के नवरत्नो मे से एक प्रसिद्ध संगीतज्ञ तानसेन का जन्म ग्वालियर मे हुआ था | ग्वालियर पर अंतिम शासन सिंधिया मराठा राजपूतो का शासन रहा | इस काल मे ग्वालियर शहर मध्यभारत एक प्रमुख व्यवसायिक केंद्र रहा | देश की आजादी के बाद नये राज्य मध्यभारत का उदय हुआ तब 1947 मे ग्वालियर इसकी राजधानी बना | इस शहर मे आपको अनेक प्राचीन मंदिर, स्मारक, महल और किला देखने को मिल जायेंगे | गालव ऋषि के नाम पर इस स्थान का नाम ग्वालियर पडा | आज यह एक आधुनिक, औधोगिक और पर्यटन शहर है |                          मानसिंह पैलेस *TOUR -: (1) Maansingh Palace = मानसिंह पैलेस यानि राजा मानसिंह तोमर द्वारा निर्मित यह महल गोपाचल पर्वत पर स्थित है | इस जगह से आप आधे शहर का नजारा देख सकते है | इसका ...

पन्ना Panna

मध्यप्रदेश राज्य मे सागर सम्भाग के अन्तर्गत पन्ना जिला आता है | इसके पड़ोसी जिलो मे सतना, कटनी, दमोह, छतरपुर और बाँदा है | पन्ना जिला हीरो की खदानो और पन्ना टाइगर रिजर्व के बजह से दुनियाभर मे विख्यात है | पन्ना जिले की प्रमुख नदी केन है, जो मगर और घडियालो का जलीय आवास है | पन्ना जिले मे 8 तेहसीले - पन्ना, पवई, अजयगढ, अमनगंज, देवेंद्रनगर, शाहनगर, गुन्नोर और राजपुरा है | पन्ना शहर डायमंड सिटी के नाम से जाना जाता है | इसका प्राचीन नाम पद्मा और पर्णा था | विन्ध्य क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले पन्ना को 16 वी सदी मे वुन्देला वंश के राजा छत्रसाल ने इसे अपनी राजधानी बनाया था | प्राक्रतिक रूप से सम्रद्ध पन्ना जिले मे पहाड़, वन, नदी, तालाब और अनेक खदाने है | पन्ना जिले मे चावल, गेंहू, ज्वार और तिलहन की पैदावार बहुता से होती है | जबकि क्रषि उत्पाद, वन्य उत्पाद और बुनाई केंद्र इस जिले के व्यापार को सम्रद्ध करते है | पन्ना जिला पेयजल व्यवस्था के लिये प्राचीन काल से ही एक नजीर रहा है, यहाँ अनेको बडे तालाब जैसे धरम सागर, बैनीसागर, लोकपाल ताल, जोधपुर तालाब आदि इसका उदाहरण है | शिक्षा के लिये जिले मे ...

Datiya दतिया

दतिया जिला मध्यप्रदेश के ग्वालियर सम्भाग मे उत्तरप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है | दतिया जिले की पडोसी सीमा मे भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, झाँसी और जालौन जिले लगते है| सिन्ध और पहु...

indore (इन्दौर)

जनसंख्या की नजर से इन्दौर शहर मध्यप्रदेश राज्य का सबसे बडा शहर होने के साथ साथ प्रदेश की आर्थिक राजधानी भी है | यह मिनी बोम्बे के नाम से भी देशभर मे मशहूर है | मालवा के पठार मे स्थित इन्दौर क्रषि और शिक्षण के क्षेत्र मे काफी सम्रद्ध है | इन्दौर जिसका प्राचीन नाम इंद्रपुर था, यहाँ 17वी सदी से मराठा साम्राज्य का अधिपत्य रहा, जिनके शासको मे बाजीराव पेशवा, मल्हारराव होल्कर, यशवन्तराव होल्कर और अहिल्याबाई का नाम प्रमुख है | स्वतंत्र भारत मे इन्दौर मध्यभारत की संयुक्त राजधानी भी रही |    इन्दौर मे प्रदेश की सबसे बडी व्यापारिक मंडिया है | इन्दौर जिले मे सोयाबीन, मूँगफली, गेंहू आदि फसलो की अधिकता से उपज होती है | यहाँ आईटी पार्क स्थापित किया गया है जहाँ कई अंतर्राष्ट्रीय कंपनी जैसे इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी ने अपने विकास केंद्र स्थापित किये है | मध्यप्रदेश का स्टोक एक्सचेंज भी यही है, मालवा मध्यप्रदेश का सबसे बडा औधोगिक क्षेत्र है, इन्दौर के निकट पीथमपुर मे अनेको अंतर्राष्ट्रीय स्तर के छोटे बडे कारखाने स्थापित है | Institute-: इन्दौर मे कई बडे राष्ट्रीय स्तर के शैक्षनिक संस्थान ...

Mata Ratangad Mandir ( रतनगढ माता धाम )

दतिया जिले की सेवढा तेहसील मे जंगलो के बीच सिन्ध नदी किनारे एक पहाढी पर माता रतनगढ वाली और कुँवर बाबा का परस्पर आमने सामने मंदिर है| जो रिस्ते मे भाई बहिन है| इस स्थान पर दुनिया का सबसे बडा घंटा लगा हुआ है, जिसका बजन 2 टन है| रतनगढ़ का माता शक्तिपीठ देशभर मे प्रसिद्ध है जहाँ सर्पदंश से पीड़ित लोग अपना बँध तुड़वाने के लिये दूर-दूर से आते है|     चुकि बँध एक अस्थाई निशान है जो सर्प के काटने पर व्यक्ति तुरंत बिष वाले स्थान के चारो तरफ उँगली फेरकर मिट्टी या भभूति से बना लेता है| बाद मे कभी भी दिवाली वाली भाई दूज पर सर्पदन्श से पीडित उक्त व्यक्ति को बँध तुड़वाने के लिये रतनगड़ धाम पर कुँवर बाबा और माता के दरबार मे आना होता है| कार्तिक माह की भाई दूज और नवरात्री पर तो यहाँ भक्तो की भारी भीड़ होती है, माता के मंदिर मे जवारे चढाने के लिये भक्तो का जनसैलाब उमड़ता है|     यहाँ आकर साक्षात शक्ति के दर्शन हो जाते है, भाई दूज पर सर्पदन्श से पीडित इंसान या जानवर दूर से ही मंदिर को देखकर मूर्क्षित हो जाते है| फिर उस व्यक्ति को कुछ आदमी स्ट्रेचर या कंधो पर उठाकर सीढियो ...